Pt Akash Articles Ganadhipati Pancharatnam Stotram

Ganadhipati Pancharatnam Stotram

गणाधिपति पञ्चरत्न स्तोत्रम्

।। श्री गणाधिपति पञ्चरत्न स्तोत्रम् ।।

ॐ सरागिलोकदुर्लभं विरागिलोकपूजितं
सुरासुरैर्नमस्कृतं जरापमृत्युनाशकम् ।
गिरा गुरुं श्रिया हरिं जयन्ति यत्पदार्चकाः
नमामि तं गणाधिपं कृपापयः पयोनिधिम् ।। १।।



गिरीन्द्रजामुखाम्बुज प्रमोददान भास्करं
करीन्द्रवक्त्रमानताघसङ्घवारणोद्यतम् ।
सरीसृपेश बद्धकुक्षिमाश्रयामि सन्ततं
शरीरकान्ति निर्जिताब्जबन्धुबालसन्ततिम् ।। २।।

शुकादिमौनिवन्दितं गकारवाच्यमक्षरं
प्रकाममिष्टदायिनं सकामनम्रपङ्क्तये ।
चकासतं चतुर्भुजैः विकासिपद्मपूजितं
प्रकाशितात्मतत्वकं नमाम्यहं गणाधिपम् ।। ३।।

नराधिपत्वदायकं स्वरादिलोकनायकं
ज्वरादिरोगवारकं निराकृतासुरव्रजम् ।
कराम्बुजोल्लसत्सृणिं विकारशून्यमानसैः
हृदासदाविभावितं मुदा नमामि विघ्नपम् ।। ४।।

श्रमापनोदनक्षमं समाहितान्तरात्मनां
सुमादिभिः सदार्चितं क्षमानिधिं गणाधिपम् ।
रमाधवादिपूजितं यमान्तकात्मसम्भवं
शमादिषड्गुणप्रदं नमामि तं विभूतये ।। ५।।

गणाधिपस्य पञ्चकं नृणामभीष्टदायकं
प्रणामपूर्वकं जनाः पठन्ति ये मुदायुताः ।
भवन्ति ते विदां पुरः प्रगीतवैभवाजवात्
चिरायुषोऽधिकः श्रियस्सुसूनवो न संशयः ।। ॐ ।।

।। इति दक्षिणाम्नाय श्रिङ्गेरी श्रीशारदापीठाधिपति शङ्कराचार्य जगद्गुरुवर्यो श्री सच्चिदानन्द शिवाभिनव नृसिंहभारती महास्वामिभिः विरचितम् श्री गणाधिपति पञ्चरत्न स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ।

 

प्रश्न शास्त्र के विदवान ज्योतिष केवल प्रश्न कुंडली से ही आश्चर्य जनक बातें बताते हैं एवम भाविश्यवानी करते हैं.प्रश्न ज्योतिष की सीमाए हैं . जब मन में प्रश्न पूछने की इक्छा हो तभी पूछना चाहिए, एक बार में एक प्रश्न ही पूंछे , स्वयं प्रश्न पूंछे, मजाक में pareakchhaa लेने के लिए प्रश्न ना पूंछे, तात्कालीन प्रश्न पूंछे, ऐसे प्रश्न न पूंछे की पाँच महीने बाद क्या होगा? मेरा अनुभव हे की मजाक में या परीक्छा लेने हेतु पूछे गए प्रश्न के उत्तर ग़लत मिलते हैं.

प्रश्न कुंडली का उपयोग , जन्म कुंडली के साथ करना मुझे अच्छा लगता हे. यदि दोनों से एक समान परिणाम प्राप्त हों तो शक की कोई गुन्जाइस नही रहती . यदि प्रश्न कुंडली अवं जन्म कुंडली अलग अलग निष्कर्ष बता रही हैं तो विश्लेषण कराने में कंही न कंही कोई चूक होती हे अतः पुनः सूष्म विश्लेषण कर ऊंचित निर्णय पर पहुँचाना चाहिए.

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