भाव

भाव

भाव का अर्थ क्या होता  है तथा बारह भावों का विभाजन कैसे किया गया इस विषय में पुराने ग्रंथों में कुछ खास स्पष्टीकरण नहीं मिलता | कुछ लोग कहते हैं की आकाश के विशिष्ट बिंदु ही भाव कहलाते हैं| कुछ लोगन के मत से आकाश के भाग ही भाव कहलाते हैं | कुछ लोग भाव और राशि आदि को काल्पनिक मानते है इन्हें प्रत्यक्ष नहीं देखा जा सकता | यह भाव सदा स्थिर रहते हैं उनमे कोई घट या बड नहीं होती | यह गणित प्रत्येक भाव में कौनसी राशि का कौनसा अंश आदि उदित है यह जानने के लिए है | निम्नलिखित बारह भावों द्वारा विचारणीय विषय है | हर ज्योतिष को यह जानना आवश्यक है की कौनसा भाव जीवन के किस अंश को दर्शाता है |

लग्न स्थान : प्रथम भाव के विचारणीय विषय :
जिज्ञासा , शरीर , वर्ण चिन्ह , आयु , सुखदुख , आचरण , पूर्वकर्म  , मस्तक , ज्ञान , कीर्ति , स्वप्न , योग्यता , तेज , न्यायनीति , शांति , अभिमान , भव्यता , त्वचा , निद्रा , वैराग्य , मर्यादा , आरोग्य , यश अपयश ,कार्य का आरम्भ , पाप पुण्य , मान अपमान , प्रश्नकर्ता के मन कि चिंता , स्वाभाव , शरीर कि दुर्बलता , भाई के मित्र , भाई को होनेवाला लाभ , भाई कि पुत्रवधू , मामा व शत्रु कि मृत्यु ,दूसरे पुत्र कि पत्नी |

धनस्थान : द्वितीय भाव के विचारणीय विषय :
घर परिवार , कुटुंब ,पति या पत्नी का सुख , वाणी , दाहिनी आँख , पूर्वार्जित जायदाद , खानपान , सोना चांदी रत्न धातु  आदि का संग्रह व  खरीदबिकरी , धान्य , बंधू के शत्रु  , वीणा आदि सुस्वर संगीत , भांजे व भतीजे , पिता से प्राप्त धन व ज्ञान , खाद्यपदार्थ , जीभ , कपडे , ताम्बा , मधुर वाणी , नम्रता , उदारता , उद्योग , कंजूसी , कांति , मन कि स्थिरता , लेनदेन के व्यवहार , खर्चीला , भोजन , विवाह सम्बन्ध कि व्यवस्था ,गला , आँखें , शेयर व्यापर , बिमा पोलिसी , फिक्स्ड डिपोसिट , ज्योतिष शास्त्र  , संसार से आसक्ति , सोना चांदी बाजार , हलवाई , होटल व्यवसाय , दलाली , शराब विक्रेता |

तृतीय स्थान : तृतीय भाव के विचारणीय विषय :
छोटा भाई या बहन , पराक्रम , औषधि मदद , छाती , दाहिना कान , धैर्य , युद्ध , मन का भ्रम , सामर्थ्य  देवग्रह , घूमना फिरना , छोटी यात्रा , बटवारा , विनोद , कामशास्त्र , पिता से मिली हुई जगह , दासी    प्रवास , धर्म के अनुसार व्यवहार ,  भौजाई , नाटक , अभिनय , हस्ताक्षर , पुत्र गोद लिए जाने कि सम्भावना , दूत , देवालय , शॉप , बाहू , कंधे , कान , रेलयात्रा ,डाक - तार विभाग , टेलीफोन बैंक या बिमा कंपनी कि नौकरी , मनोविज्ञान , दर्शनशास्त्र , चिकित्साशास्त्र , शोर्टहैण्ड , टाइपिंग , अनुवाद कार्य  अंक गणित , अँगुलियों के निशानों का अध्ययन , कानून , लेखन  , समाचार सेवा , एजेंट , सम्वाददाता   मौसम सम्बन्धी कार्य , समाचार पत्र विक्रेता , फोटोग्राफर , स्क्रीन प्रिंटिंग कार्य |

सुख स्थान : चतुर्थ भाव  के विचारणीय विषय :
संरक्षक स्थान , माता का सुख व स्वाभाव , लाभ हानि का उपभोग , घर का निर्माण , गृह्सौख्य , मन कि स्थिति , वाहन , हृदय , वृद्धावस्था कि परिस्थिति , आत्मचिंतन ,जनता  , स्तन , गुप्तधन , भंडार    शैया , पलंग , पुत्र का खर्च , भाई का धन , ससुर ,मान सम्मान , गोद लिया या दिया जाना , दूसरों से मिलने वाले उपहार , अपना गांव या शहर ,पेड लगाना , उद्योग व स्तिथि , दीवार  बड़ा घर , आनंद , कुंए का निर्माण , पानी कि खोज , सेना , गुप्त काम , पहले भाई या बहन कि संपत्ति , पति का व्यवसाय  शत्रु का व्यवहार , पति पत्नी में अदालती झगडे , भाई बांधो कि आर्थिक स्थिति , विद्या , सुगन्धित पदार्थ , अनाज कि कीमतें , स्वागत सत्कार , धन धान्य का संग्रह , गुप्त वार्ता , खनिज पदार्थ  व उनका व्यापर , पत्नी सुख , रखैल , से उत्पन्न पुत्र का सुख , बाहू , छाती , दूध , पत्नी कि कमाई , हातिपाओं रोग , खेती कि उपज , दूध का व्यवसाय , नगरपालिका आदि कि जलपूर्ति , एलोपैथी दवाइयां , मोटर कारखाने , फलों को सुरक्षित रखकर उनका व्यवसाय करना , रसायन निर्माण , औषधि निर्माण , जायदाद सम्बन्धी कानून |

पुत्रस्थान : पंचम भाव के विचारणीय विषय :
विद्या , संतान , गर्भ , मन्त्र तंत्र , लोटरी , उपासना , काम में सफलता या असफलता , ऐश आराम , ज्ञान , ज्ञान प्राप्ति कि दिशा , समय कि अनुकूलता , प्राप्ति का समय व निरंतरता , विचार शक्ति , पेट , कोख ,ग्रंथलेखन , माता का धन व वाणी , बुद्धि ,  अकस्मात लाभ , स्वाभाव कि विचित्रता , शरीर का पीछे का हिस्सा , काव्यरचना , प्रथम संतान ,नौकरों का आना जाना , जादूगरी , नाटक , शिल्पकार , गर्भ कि स्थिति , विवेक , संगीत , वाद्कुशलता , दूसरा भाई , पागलपन , व्यभिचार , प्रेम सम्बन्ध ,पशु संग्रह खानपान , नए वस्त्र , इश्वर सम्बन्धी विचार , हस्तशिल्प कि कुशलता , लकड़ी व पत्थर कि कारीगरी , खेलकूद ,खिलाडी , संवाददाता् , अर्थशास्त्र ,मंत्रजाप ,अन्नदान , पुण्य ,  फूलों का व्यवसाय , बड़ी जायदाद के ट्रस्टी , गर्भादान |

षष्ट स्थान : छटवे भाव के विचारणीय विषय :
संगती व उसका परिणाम , लाभदायक व्यवसाय , मामा व उनकी परिस्थिति , चोरों से डर व हानि , शत्रुता , स्वजनों से विरोध , इज्जत पर आंच , कमर , जख्म , व्रण , क्रूरता , शंका , हड्डी , मौसी , पिता का पुण्य ,पशु , नौकर चाकर , अंतडिया , नाभि , पेट , गर्भ का अच्छा बुरा परिणाम , नौकर कि संपत्ति व स्थिति , खरीदी , गायब या भागा हुआ मनुष्य , पिता कि और से किसी काम में बाधा , धनि होना , विषप्रयोग , बंधन से मुक्ति , उपासना का एकांत स्थान , विजय पराजय , शत्रु की स्थिति परिवर्तन  काम में विघ्न, क़र्ज़, भुतबाधा,  प्रेमी या प्रेयसी की संपत्ति,प्रवास, पशुओंसे भय,ऊँट, भैंस, निन्दा, पापकृत्य, दैव, गहन रखी हुयी चीज छुड़ाना, आनंद, चोरी की धरोहर स्मशान, जादू, मृतधन,किसान, मित्र का  भाई, चाची , पत्नी का चाचा , पत्निका खर्च , पिता या चाचा का घर छोड़कर जाना , लड़ाई में लाभ  प्रमेह , श्रम , अपवाद , उष्ण के रोग , सार्वजनिक स्वस्थ्य , डॉक्टर , धातु की खुदाई एवं नक्काशी , सिगरेट आदि का व्यसन , रसायनशास्त्र |

सप्तम स्थान : सातवें भाव के विचारणीय विषय :
मुख्य व्यवसाय के अतिरिक्त काम ( साइड बिजनेस ) , यात्रा , पति या पत्नी , लड़ाई का मैदान , व्यापार , आवागमन , झगडा , विषयवासना , मूत्राशय , व्यभिचार , कामुकता , स्त्री सुख , साझेदारी का व्यापर , इंटरनेशनल एक्सपोर्ट इम्पोर्ट का कार्य , स्त्री पुरुष का परस्पर प्रेम , दीवानी मुकदमे , लाभ हानि , हिंसा   चोर या प्रतिद्वंदी के रूप व गुण , लेन देन , जय पराजय , औषधि की क्रिया , बिल्डिंगों की रंगाई पुताई करने वाले कारीगर ,नट या नटी , गायक , सर्राफ ,साडी व्यापारी , स्त्रियों से सम्बंधित बीमारियाँ , ग्रामपंचायत , सिनेमा , थियेटर , फिल्म निर्माण व वितरण , रिकार्डिंग , रेडियो कार्यक्रम , भूगर्भशास्त्र |

अष्टमस्थान- आठवें भाव के विचारणीय विषय
आयु, नदी पार करना, दुर्गम किला, संकट ,  शस्त्र ,अपना पूर्वार्जित नष्ट धन , किसी मृत व्यक्ति के वारिस के रूप में मिलने वाला धन व संपत्ति , शत्रु , क़र्ज़ चुकाना ,पीढ़ी दर्पीधि आया हुआ धन  जीवन या मृत्यु का विचार , गुह्यास्थान , हलकी नौकरी , पराजय , कष्ट , जारण मारण , झगडा , आलसीपन ,भाई से , शत्रु से या पत्नी से होने वाला कष्ट ,राजदण्ड , धनहानि , अज्ञान , दूसरों का धन , बुरे मार्ग , पाप , जीववध , अंगहानि , अस्वस्थ रहना , बड़ी व लम्बी बीमारियाँ , चित्त की अस्वस्थता सेना का विरोध , पूर्वजों का विचार ,स्त्री धन , दरिद्रता , साझेदार की संपत्ति , शोक , चिंता  , आलस  क़र्ज़ देना या चुकाना , चोरों का धन , स्त्री भोग की इच्छा , लोगों की धरोहर हडपना , शराब पीना व बनाना , बीडी सिगरेट के कारखाने , फांसी या मृत्युदंड , दिवालिया होना |

भाग्यस्थान : नवं भाव के विचारणीय विषय :
भाग्य , शक्ति , गुरु , पिता , धर्म , तप , शुभकार्य , धर्म के कामों में संलग्न रहना , धर्मगुरु , दया , जांघ , दान , शिक्षा से लाभ ,बड़े लोग , मालिक , शुद्ध आचरण ,तीर्थयात्रा , लंबी दुरी की यात्राएं ,गुरु के प्रति भक्ति ,औषधि , चित्त की शुद्धता ,देवता की उपासना ,विद्या , परिश्रम , कमाई हुई संपत्ति ,न्याय , प्रताप ,आरोग्य , सत्संग ,ऐश्वर्य ,धन कम होते जाना ,वैराग्य , वेदपठन ,मठ ,दैवी शक्ति ,संस्थापन ,साला , परोपकार ,नदी या समुन्दर का प्रवास ,विदेश यात्रा , स्थानांतरण , नौकरी में परिवर्तन , सन्यास
मेहमान ,धरोहर ,शकुन , दुसरा विवाह , कानून , दर्शनशास्त्र , बड़े अधिकारी , उच्च शिक्षा |

कर्मस्थान : दसवे भाव के विचारणीय विषय
सन्यास , आग्या ,मान , कार्यक्षेत्र , दिव्य अलंकार , पोशाक , व्यापार , निद्रा , खेती , वेदान्त कर्म , जीवन यश , विद्या , मुद्रा , राज्यवृद्धि , कार्य की प्रवृत्ति , वर्षा , कुंवा , तालाब आदि का निर्माण , उदार्निर्वाह के लिए उद्योग , घुटने , नौकर चाकर , राजकीय सम्मान , राजनितिक हलकों में व्यवहार , बड़ा अधिकारी पद , राजा , सरकार , राज्य अधिकारी , अफसर , पुत्र गोद लेना या देना , राजा जैसा वैभव , यश , कीर्ति ,सभा , उपजीविका का काम , खरीद बिक्री , पिता के प्रति भक्ति , स्थावर जायदाद    राजाश्रय , ज्ञानयोग , ऐश्वर्य का उपभोग होना या न होना , रियासत के राजा , न्यायाधीश , वृद्ध अवस्था  अदालत में जाय पराजय , जंगल विभाग , लोहे के कारखाने व उस काम से संबद्ध लोग , सिचाई विभाग  राज्यपाल व उनके कार्यालय या जनपद समिति |

लाभस्थान : ग्यारहवें भाव के विचारणीय विषय :
सब प्रकार का धन लाभ , पशु , मित्र , राजा का धन , परिवार व रिश्तेदार , जमीन जायदाद , बांया कान  सिर के केश , बड़े भाई , सोना जवाहरात , वस्त्र , पुत्र , गहने , पराधीनता , सात्विक उपासना , धन कमाने की चतुराई , पूर्वार्जित धन , कार्य , कमाया धन , इच्छा पूर्ति , भाग्योदय , सिद्धि , आशा इच्छा  माता की आयु , विचित्र लेखन में प्रवीणता , पुत्रवधू , पत्नी के रिश्तेदार , पुत्र्सुख , बांयी जांघ , दामाद  काम का पारिश्रमिक , व्यवसाय व उसका स्थान , धन धान्य , पशु का मिलना , बोलने के गुण दोष , आनंद , मित्रसुख , राजा का अधिकार ,जागीर खजाना , सच झूठ ,व्यापर में लाभ , बुद्धि , विधान सभा , विदेश व्यापर |

व्ययस्थान : द्वादश भाव के विचारणीय विषय :
लंबी यात्रा , स्थान्परिवर्तन , कारावास , खर्च व व्यय , दुर्गति , उदारता , नींद , सुख , धन का नाश , शत्रु की विजय , पीड़ा , दुःख , नरक प्राप्ति , भाई की आँख , पांव , दान , हानि , दण्ड , हठ , नींद उचट जाना , मन का कष्ट , शत्रु का भय , बंधन , मुक्तता , क़र्ज़ से छुटकारा , हाथी घोड़े , चाचा भाई संपत्ति , शत्रु , लोक द्वेष , स्वर्ग नरक , व्यभिचार , विवाह , अधिकार त्याग या अधिकार नाश , शत्रु का क्षय , चंचलता , दीनता , बड़े  भाई , पत्नी का मामा , वाद , सड़क , मिटटी , विदेश यात्रा , स्त्री की हानि , मामा  का विरोध , सरकार व जनता का विरोध , पत्नी के रोग , संकट , रोग , परिवार का विरोध , तीर्थ  पुत्र के संकट , पिता का पराक्रम , व्यसन ,अनितिमान लोगों की संगती , सत्कार्य , व्यभिचार जन्य संतान , गुप्त शत्रु , अच्छे काम में खर्च ,परलोक गति , मोक्ष , राजकीय संकट , गुप्त ज्ञान , बड़ा रोग ,पुत्र की मृत्यु , चोरों का उपद्रव , द्वेष , परशन करना , आत्महत्या , हिंसा , कर्जदार , साहूकार , पशुओं की खरीदी बिक्री , भूतबाधा दूर करना , पुराने रोग |

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